जीबन की गाड़ी चलती जाती है अपनी मस्त मगन से
ना रुकता है किसीके लिए ना थेरेता है किसीकी के लिए
वो तो अपनी धून गति चली जाती है
जीबन की गाड़ी चलती जाती है.....
जीबन की रहो में मिलते है दोस्त कुच्छ पलके लिए
वादे करते हैं साथ में संग चलने के लिए लेकिन
जब मंजिल आ जाती है तब कोई ना सत्ता होता है
ना कोई साथ आगे जाने के लिए इन्तेजार करता है
फिर बी जीबन गाड़ी चलती जाती है.....
जीबन की रहो में आतें है बहुत सारे इंसान
और मिलते है बहुत सारे इंसान खुद को
बिना मतलब से हमारे ऊपर कुर्बान व्हो जाते को
लेकिन उसके बदले ना हम उनके ऊपर खुद को
कुरबान कर पाते है ना उनके लिए हम थेर पाते हैं
फिर बी जीबन की गाड़ी चलती जाती है.......
हम तो अकेले चले हैं जा रहें है अपनी मंज़िल
की तरफ पता नही कब आएगी मेरी मंज़िल
सुखी पड़ी है जीबन की रस्ते कब मिलेगी
उसको अपनी आशाओं की पानी इसी बात
को सोचा करे के जीबन की गाड़ी चलती जाती है.....
फिर बी जीबन की गाड़ी चलती जाती है............
ना रुकता है किसीके लिए ना थेरेता है किसीकी के लिए
वो तो अपनी धून गति चली जाती है
जीबन की गाड़ी चलती जाती है.....
जीबन की रहो में मिलते है दोस्त कुच्छ पलके लिए
वादे करते हैं साथ में संग चलने के लिए लेकिन
जब मंजिल आ जाती है तब कोई ना सत्ता होता है
ना कोई साथ आगे जाने के लिए इन्तेजार करता है
फिर बी जीबन गाड़ी चलती जाती है.....
जीबन की रहो में आतें है बहुत सारे इंसान
और मिलते है बहुत सारे इंसान खुद को
बिना मतलब से हमारे ऊपर कुर्बान व्हो जाते को
लेकिन उसके बदले ना हम उनके ऊपर खुद को
कुरबान कर पाते है ना उनके लिए हम थेर पाते हैं
फिर बी जीबन की गाड़ी चलती जाती है.......
हम तो अकेले चले हैं जा रहें है अपनी मंज़िल
की तरफ पता नही कब आएगी मेरी मंज़िल
सुखी पड़ी है जीबन की रस्ते कब मिलेगी
उसको अपनी आशाओं की पानी इसी बात
को सोचा करे के जीबन की गाड़ी चलती जाती है.....
फिर बी जीबन की गाड़ी चलती जाती है............

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